raasta KHvaab ke andar se nikalta hua tha | रास्ता ख़्वाब के अंदर से निकलता हुआ था

  - Aftab Hussain
रास्ताख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
कोईक्याख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
वोमहकथीकिमुझेनींदसीआनेलगीथी
फूलसाख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
येकिसीख़्वाबकाअहवालनहींहैकिमैंख़्वाब
देखताख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
ख़्वाबथेजैसेपरिंदोंनेपरेबाँधेहों
सिलसिलाख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
मुझकोदुनियाकेसमझनेमेंज़रादेरलगी
मैंज़राख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
नज़रउठतीथीजिधरभीमिरीमंज़रमंज़र
ज़ावियाख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
वोनिकलताहुआथाख़्वाब-कदेसेअपने
ख़्वाबथाख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
इकसिराजाकेपहुँचताथातिरीयादोंतक
दूसराख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
क्याबताऊँकोईईमानकहाँलाएगा
किख़ुदाख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
सुब्हजबआँखखुलीलोगोंकीलोगोंपेखुला
जोभीथाख़्वाबकेअंदरसेनिकलताहुआथा
  - Aftab Hussain
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

Nature Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aftab Hussain

As you were reading Shayari by Aftab Hussain

Similar Writers

our suggestion based on Aftab Hussain

Similar Moods

As you were reading Nature Shayari Shayari