वो तो शुक्र करो तुम मीठा लहजा है शहज़ादी का
जिस को प्यार समझते हो वो ग़ुस्सा है शहज़ादी का
मैं ने सारी दुनिया में बस एक हसीना देखी है
बाक़ी कोई हुस्न नहीं है चर्बा है शहज़ादी का
देखने वाले सोच रहे हैं मेरे मुँह में सिगरेट है
मैं कहने में शरमाता हूँ बोसा है शहज़ादी का
जब मैं उस का हूँ तो पूछते क्यूँ हो ये दिल किस का है
नौकर भी उस के होंगे जब बंगला है शहज़ादी का
— Ahmad Azeem















