दिल-ए-मजरूहजबभीइकनईकरवटबदलताहै
गुल-ए-हर-ज़ख़्मसेहँसताहुआनश्तरनिकलताहै
हुआहैऔरनहोगासर्ददस्त-ए-जौरगुलचींसे
शरार-ए-दिलजोमौज-ए-रंग-ओ-बूबनकरउछलताहै
यहाँकुछकमनहींदीवानगीसेहोशकादा'वा
उधरसीना-सिपरहूँमैंजिधरसेतीरचलताहै
मैंवोख़ामोशबस्तीहूँउमीदोंकेसमुंदरमें
किजिसकीख़ामुशीकीतहमेंइकतूफ़ानपलताहै
मुक़द्दरकेलिखेपरमुतमइनहोनेकोहोजाऊँ
मगरयेदर्दरहरहकरजोपहलूमेंमचलताहै
'सलाम'इकदिनपहुँचहीजाएँगेउनकेभीदामनतक
येशो'लेजिनकीगर्मीसेमिराअंगअंगजलताहै