mere ped ke saare patte sukhe hain | मेरे पेड़ के सारे पत्ते सूखे हैं

  - Ali Raza Razi

मेरे पेड़ के सारे पत्ते सूखे हैं
इक इक कर के डाली से सब टूटे हैं

रो लेते हैं छुप कर सामने हँसते हैं
मेरे घर में सारे कितने झूटे हैं

सर पे छत न बाप का साया और शिकम
इस पे क़हर कि अपने हम से रूठे हैं

जल्दी जिस्म की भूक मिटा लो ऐ साहब
घर पर मेरे सारे बच्चे भूके हैं

ख़ाली पेट था दूध पिलाया बच्चे को
नन्हे पेट पे ज़ब्त के दामन छोटे हैं

ख़ून-ए-जिगर से प्यास बुझाई लोगों की
इन आँखों से लहू के चश्में फूटे हैं

तेरा दिया ही नाम तिरे पर नहीं दिया
जितने बड़े हैं दिल के बड़े ही छोटे हैं

  - Ali Raza Razi

Ghar Shayari

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