mohabbat 'umr bhar ki raayegaan karna nahin achha | मोहब्बत 'उम्र भर की राएगाँ करना नहीं अच्छा

  - Ameeta Parsuram Meeta

मोहब्बत 'उम्र भर की राएगाँ करना नहीं अच्छा
सँभल ऐ दिल अना को आसमाँ करना नहीं अच्छा

कुछ ऐसे राज़ होते हैं बयाँ करना नहीं अच्छा
हर इक चेहरे की सच्चाई अयाँ करना नहीं अच्छा

किसी नाकाम हसरत की जो सुलगे आग सीने में
हवा यादों की मत देना ध्याँ करना नहीं अच्छा

चमन में हूँ तो फिर मैं भी चमन का एक हिस्सा हूँ
तग़ाफ़ुल इतना मेरे बाग़बाँ करना नहीं अच्छा

हिफ़ाज़त से उतारो अश्क-ए-ग़म को दिल की सीपी में
किसी क़तरे को बहर-ए-बे-कराँ करना नहीं अच्छा

उजाले ही नहीं है तीरगी भी ज़ीस्त का हासिल
कि इन तारीकियों को बे-ज़बाँ करना नहीं अच्छा

  - Ameeta Parsuram Meeta

Naqab Shayari

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