दिल तुझ को दिया जाँ भी तुझे जाने ग़ज़ल दूँ
बनवा के तुझे ताज से भी प्यारा महल दूँ
ऐ जाने वफ़ा इतना बता दे ज़रा मुझ को
मैं जान तेरे इश्क़ में कब, आज या कल दूँ
तू प्यार से चलने को जो इक बार कहे तो
मैं चाँद के भी पार तेरे साथ में चल दूँ
तू प्यार की मय मुझ को निगाहों से पिलाए
मैं जा
में मुहब्बत में तुझे इश्क़ का जल दूँ
हैं ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर तेरी प्यारी निराली
मैं ज़ुल्फ़ को सुलझाऊं या कुछ और भी बल दूँ
है मेरी तमन्ना मैं गले तुझ को लगा के
मस्ती से भरे वस्ल के रंगीं हसीं पल दूँ
— Arif Dehlvi















