दिल पे, ये दुनिया जब निशान करे
दर्द ग़ज़लों में तब बयान करे
बेच पाता मैं अपने भी ग़म को
गर ग़मों की कोई दुकान करे
मतलबी लोग सोचते हैं यही
सब उन्हीं का महज़ बखान करे
देखते रह गए अमीर सभी
कोई मुफलिस यहाँ पे दान करे
मांँ नहीं "दीप" दुनिया में तेरे पास
दूर तू कैसे फिर थकान करे
— Deepika Jain















