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शिकायत किस से है किस बात की है  - Dinesh Kumar Drouna

शिकायत किस से है किस बात की है
कमी कोई नहीं क्या ये कमी है

नज़र-अंदाज़ कर के ये मिला है
कि अब उस को मोहब्बत हो रही है

मैं इक दरिया का प्यासा था मगर अब
उसी दरिया को मेरी तिश्नगी है

सफ़र में नींद में दफ़्तर में घर में
किसी की हर जगह मौजूदगी है

मिरा ग़म ढक लिया है क़हक़हों ने
उजालों में ग़ज़ब की तीरगी है

ख़ुदा होने नहीं देता है मुझ को
मिरे अंदर का वो जो आदमी है

मोहब्बत हो कि हो नफ़रत किसी से
जगह दिल में बराबर घेरती है

Dinesh Kumar Drouna
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