हरमौसम-ए-तपाँमेंगुल-ए-तरलुटाइए
जबलोगतिश्ना-लबहोंसमुंदरलुटाइए
कहताहैहर्फ़-ए-दोस्तीअबभीपुकारके
घरमेंकिसीकेआपनपत्थरलुटाइए
महलोंमेंक़हक़होंकीहैबरसातरोज़-ओ-शब
ख़ुशियाँकभीतोमेरेभीदरपरलुटाइए
जबआपहोकेशहर-ए-फ़रोज़ाँसेआएहैं
तारीकियोंमेंनूरकीचादरलुटाइए
अहबाबचाटजाएँगेदीमककीशक्लमें
अबदौलत-ए-ख़ुलूसभीबचकरलुटाइए
ज़ेहनोंकोताज़ा-कारबनानेकेवास्ते
शेर-ओ-सुख़नकेफूलबराबरलुटाइए
'गौहर'हैबे-बिसातअभीशहर-ए-फ़िक्रमें
इकदिनमता-ए-इल्मभीइसपरलुटाइए