हुआ ये, मुझे है से था कर दिया है
ख़ुदा ने मेरा हाल क्या कर दिया है
वफ़ा की ख़ता पर ख़फ़ा बे-वफ़ा है
इसी बात ने मुब्तला कर दिया है
कहीं भी नहीं था अना में जो है अब
किसे माँग कर जा-ब-जा कर दिया है
सफ़र वापसी का अकेले किया जब
समझ आ रहा था कि क्या कर दिया है
ख़ुदा ने मेरे क्यूँ मुझे कोई अच्छी
न सूरत न ढाँचा बना कर दिया है
रखा सब्र मैं ने तो समझा कि मुझ को
ग़ज़ल का हुनर क्यूँ अता कर दिया है
मेरे सिर बला थी जिसे माँ ने सिर पर
फ़क़त हाथ रख कर दफ़ा कर दिया है
लगा था मुझे बात आगे बढ़ेगी
मगर उस ने मुझ को मना कर दिया है
बता देखते अब भला किस को? उस को
चला जो गया है गया कर दिया है
— harshit karnatak















