सागर को इक दिन में दरिया कर दूँगीइतना रो दूंँगी दुख आधा कर दूँगीबस इस लड़के से भी रब्त तमाम हुआकुछ दिन में इस को भी तन्हा कर दूंँगीमुझ से मत करवाओ उस का पुतला रंगरहने दो मैं चेहरा काला कर दूंँगीवो मेरे होंठों पे बोसा देगा परमैं घबरा कर आगे माथा कर दूंँगी— Hukm