मैं देखता नहीं हूँ बोतल तो देखती है
यार अब तो मान जा ना यार अब तो छोड़ दी है
कमरे तलक तो कोई पहुँची नहीं है अब तक
पर लड़कियों से दिल की बैठक भरी पड़ी है
माना कि ये तो सच है वो ख़ूब बे-वफ़ा है
पर ख़ूबसूरती तो फिर ख़ूबसूरती है
यार अब तो घर को जाना ही ठीक लग रहा है
वो भी चली गई है सर्दी भी बढ़ गई है
तेरे बिना मैं कितना मजबूर हो गया हूँ
जीना भी पड़ रहा है पीनी भी पड़ रही है
क्या 'हुक्म' वो ही ग़म की टूटे दिलों की बातें
इन लड़कियों को देखो ये भी तो शा'इरी है
— Hukm















