बदन से झूठ कहा दिल-लगी से झूठ कहा

बहुत थी प्यास मगर हर नदी से झूठ कहा

शब-ए-फ़िराक़ मेरे यार दोस्तों ने जब
तुम्हारा ज़िक्र किया तो सभी से झूठ कहा

जो मेरे साथ चले हम सफ़र कहा उन को
तवील राह थी हर अजनबी से झूठ कहा

कहाँ कहाँ से गुज़रता गया मैं याद नहीं
नहीं है याद कि किस किस गली से झूठ कहा

बिछड़ने का भी बहाना नहीं मिला हम को
किसी के साथ रहे और किसी से झूठ कहा

— Lalit Pandey

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