डूबता जाता हूँ मैं यार तिरी आँखों में
कोई दरिया हैं नुमूदार तिरी आँखों में
लाख ग़ुस्सा तू करे फिर भी तिरी चाहत हैं
मुझ को आता हैं नज़र प्यार तिरी आँखों में
ये समुंदर तिरी आँखों का बदल लगता हैं
लहरे उठती हैं लगातार तिरी आँखों में
चूम कर सोए थे तस्वीर में आँखें तेरी
हम हुए सुब्ह को बे-दार तिरी आँखों में
इक फ़क़त मैं ही नहीं जिस ने गवाई सुध-बुध
खो गए कितने ही फनकार तिरी आँखों में
कोई तैराक ही उस पार उतर सकता हैं
न सफीना हैं न पतवार तिरी आँखों में
— Moin Hasan















