rone ki umr hai na sisakne ki umr hai | रोने की उम्र है न सिसकने की उम्र है

  - Owais Ahmad Dauran
रोनेकीउम्रहैसिसकनेकीउम्रहै
जाम-ए-नशातबनकेछलकनेकीउम्रहै
शबनमकीबूँदपीकेचटकनेकीउम्रहै
गुलशनमेंफूलबनकेमहकनेकीउम्रहै
सद-मर्हबायेगुमरही-ए-शौक़चश्म-ओ-दिल
हाँराह-ए-आरज़ूमेंभटकनेकीउम्रहै
इकजुर्महैख़याल-ओ-तसव्वुरगुनाहका
येउम्रसिर्फ़पीकेबहकनेकीउम्रहै
दीवानाबनकेनज्दकेसहरामेंघूमिए
लैलाकीजुस्तुजूमेंभटकनेकीउम्रहै
बेचैनक्यूँँहोरूहकिसीएककेलिए
हरमाह-वशपेजानछिड़कनेकीउम्रहै
इसदौर-ए-इम्बिसातमेंब-हालत-ए-जुनूँ
हरकू-ए-दिलबराँमेंभटकनेकीउम्रहै
लाज़िमनहींकिख़ुदकोबचाताफिरूँतमाम
शीशाहूँचोटखाकेदरकनेकीउम्रहै
तस्कींवोदेरहीहैंपरक़ल्ब-ए-ना-सुबूर
तूऔरभीधड़ककिधड़कनेकीउम्रहै
जबचलपड़ाहूँघरसेतोमंज़िलकीशर्तक्या
हूँरह-नवर्द-ए-शौक़भटकनेकीउम्रहै
हूँआफ़्ताब-ए-ताज़ाहुआहूँअभीतुलू'अ
अपनेजहान-ए-नौमेंचमकनेकीउम्रहै
ऐवानतख़्त-ओ-ताजहैंमेरीलपेटमें
शोलाहूँमैंयेमेरेभड़कनेकीउम्रहै
'दौराँ'मैंबज़्म-ए-दोस्तमेंछेड़ूँक्यूँँग़ज़ल
येज़मज़
मेंकेदिनहैंलहकनेकीउम्रहै
  - Owais Ahmad Dauran
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