ग़ज़लें वज़लें कहता जाए
उस को धुन में गाया जाए
राजा ज़िंदा रहे आख़िर तक
जान से चाहे घोड़ा जाए
दूरी बनाना आसाँ होगा
बीच में मज़हब लाया जाए
दुनिया से मैं तब जाऊँगा
पहले रोना धोना जाए
मुझ को सुनने वालों बोलो
उस को कितना सोचा जाए
आज रहे घर वाला घर पे
जॉब पे बाहर वाला जाए
दूर निशाना है वो जितना
तीर उतना ही गहरा जाए
मुझ से पहले इंटरव्यूँ को
मेरे बराबर वाला जाए
हाथ वो प्रॉपर्टी आएगी
दुनिया से कब बूढ़ा जाए
नज़रें मिलने से धोखे पर
शर्म हया का पर्दा जाए
सर्वे पे नीची बस्ती को
इंसाँ कोई ऊँचा जाए
दूर अगर जो अपना जाए
आँखें जाए सपना जाए
ग़ज़लें सुनने से क्या होगा
शाइ'र को भी समझा जाए
दिल रोएगा जाने वाले
वक़्त बिछड़ते रोया जाए















