वो आली दिमाग़ नइँ मरेगा
दे कोसने जाग़ नइँ मरेगा
हाँ फौ़त हुईं हैं तितलियाँ कुछ
पर उस से ये बाग़ नइँ मरेगा
मर सकती है तेरी रौशनी पर
ये मेरा चराग़ नइँ मरेगा
सब जाएँगे एक एक कर के
जल्दी बे-दिमाग़ नइँ मरेगा
उठ उठ के पुकारता है मुर्दा
क़ातिल ये सुराग़ नइँ मरेगा
मर जाएँगे शा'इरी फ़हम सब
वो जौन, वो दाग़ नइँ मरेगा
कु़र्बान कमाल-ए-हुस्न फूलों
भँवरा सू-ए-बाग़ नइँ मरेगा
— Abuzar kamaal















