आइने टूट कर सब फ़ना हो गए
जिन का पत्थर था दिल देवता हो गए
उन की सूरत के काइल हुए इस क़दर
उस नगर के ही हम डाकिया हो गए
इब्तिदा वो ही है इंतिहा वो ही है
बंदगी भी वही ज्यूँ ख़ुदा हो गए
शोहरतों में तो वो, साथ चलते रहे
आई जो मुफ़्लिसी तो जुदा हो गए
एक दूजे के बिन दोनों कुछ भी नहीं
तुम महक फूल की हम हवा हो गए
वो 'मलक' आँख से ऐसे ओझल हुए
ख़ुशनुमा सारे मंज़र ख़फ़ा हो गए
— Ram Singar Malak















