ज़िंदगी कट जाएगी चलते रहो आराम से
बस सफ़र में रक्खो मतलब सिर्फ़ अपने काम से
मेरी जानिब प्यार से देखा जो उस ने बज़्म में
आज कल जलने लगे हैं लोग मेरे नाम से
जब कभी गुज़रूँ गली से तेरा हो दर्शन मुझे
मेरी ख़ातिर तेरी चौखट कम नहीं है धाम से
गर मेरी हाथों की रेखाओं में तू शामिल नहीं
तू इशारा दे तो तुझ को माँग लूँ मैं राम से
ये ज़बाँ कट जाए या फिर सर करे कोई क़लम
प्यार जो करते हैं कब डरते हैं वो अंजाम से
साहिबे मसनद को बस मसनद से ही मतलब रही
इनको मतलब कब रहा है देश के आवाम से
तुम ज़रा बेचैन हो के हम ज़रा बेताब से
यूँ मलक मिल जाएँ राधा ज्यूँ मिली थी श्याम से
— Ram Singar Malak















