उस की शबाहत किसी शम्स-ओ-क़मर में नहीं

एक उसे देख कर कोई नज़र में नहीं

क़ासिद ज़ोहरा मक़ाम कह उसे मेरा सलाम
जिस का नशेमन मिरी राह-गुज़र में नहीं

क्या कशिश जज़्ब-ए-दिल तुझ में कमी है कि वो
मेहवर-ए-सय्यारगाँ तेरे असर में नहीं

चश्म-सितारा-शुमार कुश्ता-सदा इंतिज़ार
दीद की कोई नवेद नज्म-ए-सहर में नहीं

हम जो दिखाते नहीं लाला-ओ-गुल की तरह
ये न समझना कोई दाग़ जिगर में नहीं

सब्ज़ क़बा-ए-चमन सिर्फ़ फ़रेब-ए-नज़र
आस की कोंपल किसी शाख़-ए-शजर में नहीं

एक तुझी को 'सबा' क्यूँ है थकन का गिला
मौजा-ए-गुल और हवा कौन सफ़र में नहीं

— Sabiha Saba

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