यार मेरा रूठा ग़ज़ल कहनी पड़ी
प्यार मेरा टूटा ग़ज़ल कहनी पड़ी
सब दिखावा है और सब के सब झूटे
ये जहाँ है झूटा ग़ज़ल कहनी पड़ी
मैं भरोसा किया उसी पर और, वो
ज़िंदगी ही फूँका ग़ज़ल कहनी पड़ी
साथ चलने के वाइदे थे हर क़दम
यूँ मिला ना धोका ग़ज़ल कहनी पड़ी
मैं मोहब्बत करता रहा "नेहाल" वो
इक दफ़ा ना सोचा ग़ज़ल कहनी पड़ी
— Sandeep Gandhi Nehal















