बंधनों से रिहाई मत करना
यूँ कभी भी जुदाई मत करना
लाख दुनिया कहे बुरा मुझ को
आप मेरी बुराई मत करना
जो दिया दिल मिरी निशानी है
चीज़ अपनी पराई मत करना
इस क़दर दूर कर मुझे ख़ुद से
जान ये जग हँसाई मत करना
मुझ से ये बोझ अब नहीं उठता
देखो तुम आशनाई मत करना
— Sandeep Gandhi Nehal















