तुम नहीं तो कहीं क़रार नहीं
अब बहारों का इंतिज़ार नहीं
सिर्फ़ तुम पर यक़ीन है मुझ को
इस ज़माने पे ऐतिबार नहीं
आप की रहबरी से है उम्मीद
मेरा रस्तों पे इख़्तियार नहीं
फूल पर्वत नदी सितारे झील
बिन तुम्हारे कहीं निखार नहीं
सिर्फ़ झगड़ा हुआ है छोटा सा
दोस्ती में कहीं दरार नहीं
मैं ने नंबर लिया है बस यूँ ही
गुफ़्तगू का कोई विचार नहीं
जिस की तख़्लीक़ इश्क़ ने की हो
उस सा कोई भी शाहकार नहीं
— Sapna Jain















