वो बनकर साथ है साया हमारा
तअल्लुक़ है बहुत गहरा हमारा
ज़रूरत ही नहीं फिर ज़ेवरों की
अगर हो सादगी गहना हमारा
किसे मिलती है आसानी से मंज़िल
बहुत पुर-ख़ार था रस्ता हमारा
हमारे दिल ने उन को भी दुआ दी
जिन्हें भाया नहीं होना हमारा
बना लेता अगर अपना हमें तू
तेरे सजदे में सर रहता हमारा
सदा जिन के इशारों पर चले हम
वही सुनते नहीं कहना हमारा
कई लोगों को ये भी चुभ रहा है
चमन कैसे बना सहरा हमारा
पुकारा आज उस ने जान कह कर
मुकम्मल हो गया सपना हमारा
— Sapna Jain















