अपनी ख़ुशबू की वो बरसात नहीं करती है
देख भी ले तो कोई बात नहीं करती है
हुस्न क़ुदरत नें बहुत ख़ूब दिया है उस को
फिर भी लोगों में वो ख़ैरात नहीं करती है
वो उसूलों की मेरी जान बहुत क़ाइल है
रौशनी हो तो मुलाक़ात नहीं करती है
कैसे मुमकिन है मियाँ उस से ख़यालात मिलें
एक लड़की जो मुनाजात नहीं करती है
जाने किस बात पे इस बार हुई है ग़ुस्सा
ज़िंदगी खुल के कोई बात नहीं करती है
— Shahzan Khan Shahzan'















