नाकाम मोहब्बत की कहानी भी लिखेंगे
क्यूँ रायगाँ बीती ये जवानी भी लिखेंगे
इक उम्र रखे लाश को घर में तरो ताज़ा
फिर कैसे हुई लाश पुरानी भी लिखेंगे
वो दाग़े जिगर छाले सभी पाँव के और फिर
दिल के सभी ज़ख़्मो की निशानी भी लिखेंगे
दरियाये नज़र आब से महरूम रहा क्यूँ
आँखों में नहीं आया जो पानी भी लिखेंगे
तफ़्सील से बत
लाएँगे हम मिसरो का मतलब
अश्आर में लफ़्ज़ों के मआ'नी भी लिखेंगे
जीते जी न गुल खिल सका इस दिल के चमन में
तुर्बत पे हुई ख़ूब फ़िशानी भी लिखेंगे
वो शाम तिरे बा'द जो फिर रास न आई
कितनी थी "अमन" तब वो सुहानी भी लिखेंगे
— Aman Kumar Shaw "Haif"















