याद

मुझे तुम याद आते हो
बहुत ध्यान भटकाते हो
पढ़ नहीं पाता सही से
पन्नों पर उतर आते हो
नींद का तो पूछो ही मत
सुब्ह होने तक जगाते हो
सुनो आईना बनों ना मेरा
जैसे तुम मुझे बनाते हो
तुम्हारी साँसों से तुम जानाँ
सारा जहाँ महकाते हो
शौक़ से उड़ते क्यूँ नहीं तुम
ख़्वाहिशें दिल में दबाते हो
तुम सा हसीं नहीं कोई यहाँ
मान लो ना क्यूँ इतराते हो
चले आओ ना छत पर
जैसे! हर बार आते हो
'शिवम्' से मिलने की ख़ातिर
'शिवम्' से ही शर्माते हो

— Shivang Tiwari

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