आज दिल सोच रहा है जैसे

मय हर इक ग़म की दवा है जैसे

जाँ हथेली पे लिए फिरते हैं
इक यही शर्त-ए-वफ़ा है जैसे

कहीं मोती कहीं तारे कहीं फूल
दहर तेरी ही क़बा है जैसे

दश्त-ए-ग़ुर्बत में तिरा नामा-ए-शौक़
हाथ में फूल खिला है जैसे

इस तरह चुप हैं तिरा ग़म ले कर
ये भी क़िस्मत का लिखा है जैसे

— Taj Bhopali

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Udasi Shayari

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