बात करने की इस कमी ने मेरी
लाज रक्खी सुखनवरी ने मेरी
वो बिछड़ते हुए बहुत ख़ुश थी
जान ले ली थी इस ख़ुशी ने मेरी
अपनी इज़्ज़त जिसे समझता रहा
नाक कटवाई है उसी ने मेरी
काट ली कैसे ज़िंदगी तुम ने
ख़ूब काटी है ज़िंदगी ने मेरी
सिर्फ़ वादे किए निभाया नहीं
तीरगी दी है रौशनी ने मेरी
उस के जाने पे लग रहा था मुझे
जेब काटी है फिर किसी ने मेरी
— Tarique Jamal















