सदाक़त मोहब्बत वफ़ा कुछ नहीं है
यहाँ मालओज़र के बिना कुछ नहीं है
तेरी अस्ल सूरत नज़र जो न आए
तो फिर कोई भी आईना कुछ नहीं है
है वो देने वाला ही जब आस्माँ में
ज़मीं से हमें माँगना कुछ नहीं है
मुक़द्दर ने बख़्शे ये नाले ये आँसू
कि ख़ुदस तो हम ने चुना कुछ नहीं है
मेरी मौत की हर तरफ़ धूम है पर
सुना है कि उस ने सुना कुछ नहीं है
किसी बे-वफ़ा से लगाया जो दिल तो
तेरे हक़ में कोई दुआ कुछ नहीं है
तू दुनिया में क्या 'मुन्तज़िर' ढूँढ़ता है
यहाँ तेरी ख़ातिर बना कुछ नहीं है
— Vinamra Singh















