suraj ka zirah-baktar | सूरज का ज़िरह-बक्तर

  - Wazir Agha
सूरजकाज़िरह-बक्तर
चमकातोमैंघबराया
टूटीहुईखिड़कीसे
लहराताहुआनेज़ा
कौंदेकीतरहआया
मैंदर्दसेचिल्लाया
होंटोंनेपढ़ेमंतर
सीमाबसीपोरोंने
इकपोटलीअब्रककी
छिड़कीमिरेचेहरेपर
औरकिरनोंकाइकछींटा
मारामिरीआँखोंपर
आँखेंमिरीचुंधियाईं
कुछभीनज़रआया
जबआँखखुलीमेरी
देखाकिहरइकजानिब
ज़रतारसीकिरनोंका
इकज़र्दसमुंदरथा
औरज़र्दसमुंदरमें
चाँदीकीपहाड़ीपर
मैंपेड़थासोनेका
शाख़ोंमेंमिरीहरसू
झंकारथीपत्तोंकी
उड़तीहुईचिड़ियोंकी
याआगकीडलियोंकी
इकडारसीआईथी
औरमुझमेंसमाईथी
क़दमोंकेतलेमेरे
ज़ंजीरथीलम्होंकी
मेरेज़िरह-बक्तरसे
जोकौंदालपकताथा
तारोंकेझरोकोंतक
पलभरमेंपहुँचताथा
मैंजिस्मकेमरक़दसे
बाहरभीथाअंदरभी
मैंख़ुदहीपहाड़ीथा
औरख़ुदहीसमुंदरभी
  - Wazir Agha
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

Nazar Shayari

Our suggestion based on your choice

Similar Writers

our suggestion based on Wazir Agha

Similar Moods

As you were reading Nazar Shayari Shayari