बनाने वाले तुझे क़सम है, तू कुछ पुराना नहीं बनाना

अगर मोहब्बत बनानी है तो तू फिर ज़माना नहीं बनाना

तू कोई क़िस्सा कोई कहानी कोई फ़साना नहीं बनाना
नहीं बनाना तू हीर कोई, कोई दीवाना नहीं बनाना

तुझे बना कर बनाने वाले ने भी बनाने का काम छोड़ा
तुझे बना कर के क्या बनाना, सो उस ने ठाना, नहीं बनाना

है जब ये मालूम हम को तकिए हमारा बिस्तर ही छोड़ देंगे
तो क्यूँ मशक्कत है करनी, बिस्तर भी क्यूँ बनाना, नहीं बनाना

हमें नहीं आरज़ू-ए-मंज़िल, हमें ये राहें लुभा रहीं हैं
हम उम्र भर राह में रहेंगे, हमें ठिकाना नहीं बनाना

— Lokendra Faujdar 'Aham'

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