सुब्ह उदास उदास शाम उदास उदास
वीराँ मयक़दा कि जाम उदास उदास
आप क्या गए कि वीराँ घर हुआ
दर उदास उदास बाम उदास उदास
इस हयात के सफ़र में दोस्तों
मंज़िलें जुदा कि गाम उदास उदास
इस क़दर उदास हम हुए अज़ीज़
शय लगीं हमें तमाम उदास उदास
राह-ए-इश्क़ में मिला न कुछ हमें
बस मिले सभी मक़ाम उदास उदास
दश्त की तरफ़ निकल पड़े मगर
ग़ौर तो करो हैं राम उदास उदास
आ गया कि दौर क्या जहान का
रिन्द ख़ुश हुए इमाम उदास उदास
— Azhan 'Aajiz'















