हमें मालूम है दस्तार गिरती है
गिराओ तो सही सरकार गिरती है
क़यामत पर उतर आए अगर जनता
सिकंदर तक की भी तलवार गिरती है
वहीं पर मौत आ कर चूम लेती है
जहाँ पर ज़िंदगी थक-हार गिरती है
किसी को दोष मत दो ये जवानी है
यहाँ हर कार की रफ़्तार गिरती है
बड़ी मज़बूत रखना नींव रिश्तों की
ज़रा-सी ग़लती से दीवार गिरती है
नज़र में चढ़ नहीं सकती दुबारा से
नज़र से चीज़ जो इक बार गिरती है
कि कुछ हासिल नहीं होना यहाँ 'जानिब'
ये दुनिया इश्क़ में बेकार गिरती है
— Janib Vishal















