नम की तफ़सीलों पर क़ायम, आँसू थे
तुम कहते हो, आबे-ज़मज़म? आँसू थे
ख़्वाबों की कश्ती में बैठे, पार हुए
जिस को दरिया समझे थे हम, आँसू थे
एक सुकूत, लबों पर तारी था, उस के
और निगाहों में, बस पैहम आँसू थे
उस ने जाने कैसे पहचाना होगा
बारिश के पानी में मुदग़म, आँसू थे
कैसे होते ज़ख़्म दवाओं से अच्छे
जब मेरे ज़ख़्मों का मरहम, आँसू थे
ओस की सूरत, जो बिखरे थे, फूलों पर
क़तरा-क़तरा, शबनम-शबनम, आँसू थे
कौन अज़ादारों में शामिल था मेरे
मेरी मर्ग थी, मेरा मातम, आँसू थे
तू आँखों का पानी कहता रह इनको
मैं सीधा कहता हूँ, हम-दम, आँसू थे
आज बताता हूँ, सागर क्यूँ खारा है
सागर में, इक रोज़ फ़राहम, आँसू थे
बिछड़े थे जिस रोज़ 'करन' क्या मंज़र था
दोनों की आँखों में बाहम, आँसू थे















