दुनिया में रहना पड़ता है

फिर सब कुछ सहना पड़ता है

भूले तो नहीं हैं उन को हम
पर ऐसा कहना पड़ता है

यादों में उन की जीना ये है
फिर मरते रहना पड़ता है

दिलकश लौ हो तुम को क्या है
मज्ज़ूब को दहना पड़ता है

यादों की ठंडी गर्मी में
यूँ जलते रहना पड़ता है

इन सूखी आँखों में 'लेखक'
हाँ असलन बहना पड़ता है

— Lekhak Suyash

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