यूँँचाहतोंमेंकोईरंज-ए-आश्नाईनदे
किदिलहोराखमगरआगभीदिखाईनदे
असीर-ए-दाम-ए-मोहब्बतकहाँसेहोआज़ाद
किउनकीज़ुल्फ़कीज़ंजीरजबरिहाईनदे
कहाँसेसुनतासदामेरीउसहुजूममेंवो
पुकारोख़ुदकोतोआवाज़भीसुनाईनदे
हुजूम۔ए-लफ़्ज़सेक्याचमकेसीना-ए-क़िर्तास
तिराख़यालक़लमकोजोरौशनाईनदे
येकैसाख़ौफ़मुसल्लतहैज़ेहन-ओ-दिलपरअब
परिंदाख़ुदकहेसय्यादसेरिहाईनदे
वोजिननिगाहोंकोकलतीरगीकाशिकवाथा
हैआजरौशनीइतनीकिकुछदिखाईनदे
अताहोदरसेतिरेइज़्ज़-ओ-जाहकीदौलत
निगाह-ए-ख़ल्क़मेंकरदेबड़ाबड़ाईनदे