आशिक़ोंकोऐफ़लकदेवेगातूआज़ारक्या
दुश्मन-ए-जाँउनकाथोड़ाहैदिल-ए-बीमारक्या
रश्कआवेक्यूँँनमुझकोदेखनाउसकीतरफ़
टकटकीबाँधेहुएहैरौज़न-ए-दीवारक्या
आहनेतोख़ेमा-ए-गर्दूंकोफूँकादेखेंअब
रंगलातेहैंहमारेदीदा-ए-ख़ूँ-बारक्या
मुर्ग़-ए-दिलकेवास्तेऐहम-सफ़ीरोकमहैक्यूँँ
कुछक़ज़ाकेतीरसेतीर-ए-निगाह-ए-यारक्या
चलकेमय-ख़ानेहीमेंअबदिलकोबहलाओज़रा
'ऐश'याँबैठेहुएकरतेहोतुमबेगारक्या