जिन से डरते थे मरासिम उन हदों तक आ गए

आप से फिर रफ़्ता रफ़्ता ख़ुद से हम उक्ता गए

रेत पर कुछ दूर तक देखे थे हम ने साफ़ साफ़
फिर ग़ुबार उठा कोई वो नक़्श भी धुँधला गए

ख़ुद-कुशी सूरज ने कर ली ये बताने के लिए
काले रंगों के परिंदे आसमाँ पर छा गए

चंद जुगनू हैं यहाँ पर और मुसलसल तीरगी
साहबो हम शम्अ'' ले कर किस खंडर में आ गए

वो वली है और न बादा-ख़्वार है दानिशवरों
आप भी हम-ज़ाद से मेरा ही धोखा खा गए

— Akhilesh Tiwari

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