आज फिर दिल की यूँँ बेकरारी हुई
ज़ख़्म खाए नए आह-ओ-ज़ारी हुई
उस को ख़्वाबों के जुगनू सवेरा कहें
सुब्ह की गोद में शब उतारी हुई
लिख रही हूँ मेरी इश्क़ की दास्ताँ
फिर निगाहों से जो अश्क-बारी हुई
कैस से मिलने बन आज लैला चली
सज के तैयार उस की सवारी हुई
जीत ली झूठ कह उस ने सब बाज़ियाँ
हार सच बोल कर भी हमारी हुई
ज़िक्र चंदन किया शे'र में उन का जब
फिर ग़ज़ल किस क़दर देखो प्यारी हुई
— Chandan Mishra















