dil pahaadon par chala jaa.e ki maidaanon men ho | दिल पहाड़ों पर चला जाए कि मैदानों में हो

  - Chandrabhan Khayal
दिलपहाड़ोंपरचलाजाएकिमैदानोंमेंहो
भीड़मेंलोगोंकीयाख़ालीशबिस्तानोंमेंहो
शोरफिरभीतेज़तूफ़ानोंकीसूरतहरघड़ी
तोड़तारहताहैख़ल्वत-ख़्वाहसीनोंकाजुमूद
रेज़ारेज़ाहोगएमेरीतरहकितनेवजूद
अबनहींमुमकिनकिसीसहरामेंमजनूँकावरूद
ना-तवाँशख़्सियतेंबर्क़ीतवानाईलिए
रातकेकालेबदनकोचाटकरहैंमुतमइन
जलरहाहैहरशजरइसशहरकाअबरातदिन
उड़रहेहैंहाथसेतोतोंकीसूरतसाल-ओ-सिन
रौशनीकारंगजैसेकुछसमझआतानहीं
शहरकीतहज़ीबकारुख़किसतरफ़हैक्यापता
आदमीसादाहैयाख़ंजर-ब-कफ़हैक्यापता
किसलिएयेशोर-ए-मोहमलसफ़-ब-सफ़हैक्यापता
मैंनेहरअंदाज़सेसमझाहैसारेशहरको
शहरजोख़्वाबोंकेजंगलकेसिवाकुछभीनहीं
उम्रसारीछीनकरजिसनेदियाकुछभीनहीं
जैसेमेरेवास्तेबाक़ीरहाकुछभीनहीं
अपनेगालोंपरतमाँचाजड़केख़ुशहोजाऊँमें
आजरौशनक़ुमक़ुमोंकेबीचजागायेशुऊ'र
यूँँतोहरमौसमकेचेहरेपरनुमायाँहैंसुतूर
इकपरिंदातकनहींलेकिनहवामेंदूरदूर
मछलियाँछतपरसिखानेकेलिएजबख़्वाहिशें
सीढ़ियोंपरपाँवरखतीहैंतोजातीहैचील
ठोंकदीजाएगीअबशायदसभीज़ेहनोंमेंकील
उठरहीहैहरतरफ़जलतेअँधेरोंकीफ़सील
गेरुआकपड़ोंमेंलिपटाज़र्दमुस्तक़बिलमुझे
मशवरादेतारहेगाऔरमैंमरजाऊँगा
  - Chandrabhan Khayal
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Saadgi Shayari

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