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इश्क़ के रस्ते चलते चलते हम ऐसे मजबूर हुए  - Devmani pandey

इश्क़ के रस्ते चलते चलते हम ऐसे मजबूर हुए
एक ज़रा सी ठेस लगी तो दल के शीशे चूर हुए

प्यार में लाखों दिल टूटे और बने हज़ारों अफ़्साने
जिन में दिल का दर्द था शामिल वो क़िस्से मशहूर हुए

सच्चे लोगों को ये दुनिया जीने ही कब देती है
उन से पूछो जो ये जीवन जीने पर मजबूर हुए

इस दुनिया में कुछ पाने का मूल चुकाना पड़ता है
मिली है शोहरत जिन को ज़ियादा वो अपनों से दूर हुए

अपना उजाला बाँट के सब को ख़ुद में ही खो जाते हैं
ऐसे लोग मगर ऐ दुनिया तुझ को कब मंज़ूर हुए

Devmani pandey
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