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कहाँ गई एहसास की ख़ुशबू फ़ना हुए जज़्बात कहाँ  - Devmani pandey

कहाँ गई एहसास की ख़ुशबू फ़ना हुए जज़्बात कहाँ
हम भी वही हैं तुम भी वही हो लेकिन अब वो बात कहाँ

मौसम ने अंगड़ाई ली तो मुस्काए कुछ फूल मगर
मन में धूम मचा दे अब वो रंगों की बरसात कहाँ

मुमकिन हो तो खिड़की से ही रौशन कर लो घर-आँगन
इतने चाँद सितारे ले कर फिर आएगी रात कहाँ

ख़्वाबों की तस्वीरों में अब आओ भर लें रंग नया
चाँद समुंदर कश्ती हम तुम ये जल्वे इक साथ कहाँ

इक चेहरे का अक्स सभी में ढूँड रहा हूँ बरसों से
लाखों चेहरे देखे लेकिन उस चेहरे सी बात कहाँ

चमक दमक में डूब गए हैं प्यार वफ़ा के असली रंग
'देव' जहाँ वालों में अब वो पहले से जज़्बात कहाँ

Devmani pandey
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