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हम अपने आप को इतना बदल नहीं सकते  - Dheerendra Singh Faiyaz

हम अपने आप को इतना बदल नहीं सकते
तुम्हारे कहने से चेहरा बदल नहीं सकते

बदलना चाहें अगर क्या बदल नहीं सकते
मगर जो हाल है दिल का बदल नहीं सकते

तुम्हारे वास्ते या'नी बदल चुके हैं बहुत
अब और ख़ुद को ज़ियादा बदल नहीं सकते

अजीब लोग हैं दुनिया बदलना चाहते हैं
मगर वो ख़ुद को ज़रा सा बदल नहीं सकते

डरे हुए हैं समुंदर मिरी रवानी से
मगर वो चाह के रस्ता बदल नहीं सकते

हमारी ज़ात को मुद्दत में ये हुआ है नसीब
अब अपने जीने का लहजा बदल नहीं सकते

अलावा दुख के तिरी क़िस्मतों में हम भी हैं
नसीब तेरा लिहाज़ा बदल नहीं सकते

वो एक दूजे से आँखें बदलते रहते हैं
जो लोग रोज़ का रोना बदल नहीं सकते

बदल रहा है रवय्या ज़रा ज़रा ही सही
अब एक दिन में तो सारा बदल नहीं सकते

Dheerendra Singh Faiyaz
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