पहले अहबाब की कहानी लिख
फिर हर इक लफ़्ज़ के मआ'नी लिख
क्यूँ तिरे अपने ग़म-गुसारों से
ज़ख़्म-ख़ुर्दा है ज़िंदगानी लिख
ख़ूबियाँ लिख शराब की लेकिन
रूह-अफ़्ज़ा है सिर्फ़ पानी लिख
देख कर बहर-ओ-बर के हंगा
में
कोई दिलचस्प सी कहानी लिख
दिल के सहरा में गर्म अश्कों से
कैसे होती है बाग़बानी लिख
हर्फ़-ए-अव्वल से लिख के नाम-ए-ख़ुदा
दिल की तख़्ती पे हर्फ़-ए-सानी लिख
वस्ल की शाम के वरक़ पे 'कँवल'
शादमानी ही शादमानी लिख
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by G R Kanwal
our suggestion based on G R Kanwal
As you were reading Paani Shayari Shayari