ख़बर है मेह्रूमियों से आगे निकल चुका है

सफीर वीरानियों से आगे निकल चुका है

हमें ये ताक़ीद की गई है के हँसते रहिए
सो केह्क़हा सिस्कियों से आगे निकल चुका है

ये किस ताक़्क़ुब में बुझ रही हैं हमारी आँखें
ये कौन बीनाईयों से आगे निकल चुका है

मक़ाम ए हैरत पे अक़्ल पहुंची, खुला मुअम्मा
क़यास हैरानियों से आगे निकल चुका है

हवा से महलों में आज क़न्दील जल बुझी हैं
प इक दिया आंधियों से आगे निकल चुका है

ए शोब्दागर ख़बर है तुझ को के शोब्दाबीं
तेरे तमाशाईओं से आगे निकल चुका है

तबीब आबे हयात लाए हैं कासा भर लो
मरीज़ आसानियों से आगे निकल चुका है

क़फस में रह कर लगा है जी ऐसे बेडियों से
असीर आज़ादीयों से आगे निकल चुका है

बयान के जंगलों में जिस को तलाश्ते हो
वो ज़ब्त की वादियों से आगे निकल चुका है

सुखन सलाख़ें भी जंग आलूद हो चुकि हैं
शऊर भी क़ाफियों से आगे निकल चुका है

फ़ना के बय्यत में आ चुका है जुनूने "जानी"
बक़ा के अब ज़ावियों से आगे निकल चुका है

— Jaani Lakhnavi

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