फिर मौसम-ए-यख़-बस्ता बदलने की ख़बर दे
रग रग में जमी बर्फ़ पिघलने की ख़बर दे
या दिल के चराग़ों को लहू और अता कर
या राह में फिर चाँद निकलने की ख़बर दे
या मौसम-ए-ख़ुश-रंग कोई भेज ज़मीं पर
या गर्दिश-ए-अफ़्लाक बदलने की ख़बर दे
बस उड़ते बगूले हैं सराबों के सफ़र में
एड़ी कोई चश्में के उबलने की ख़बर दे
दर बंद किए लोग घरों में हैं मुक़य्यद
आसेब-ज़दा रात के ढलने की ख़बर दे
भीगी हुई लकड़ी हूँ धुआँ देती हूँ पहरों
अब मुझ को मिरी आग में जलने की ख़बर दे
अख़बार भी दहशत का तराशा है 'तबस्सुम'
हर सुब्ह फ़क़त दिल के दहलने की ख़बर दे
— Kahkashan Tabassum















