बोल जानी मौत क्या है, ज़िन्दगी क्या, प्यार क्या है

इश्क़ ही गर जीत है तो, ये बताओ हार क्या है

कुछ हक़ीक़त, कुछ फ़साना, कुछ फ़रेबी ये ज़माना
दिल चुराना, दिल लगाना, दिल दुखाना प्यार क्या है

इक‌ हसीना ख़ूब-सूरत, इक दिवानी शायरा है
है ख़ुदा या है ख़ुदाई, ये हसीना यार क्या है

इस तरफ़ तो है मुहब्बत, उस तरफ़ का क्या पता है
ज़िन्दगी इस पार है ये, ज़िन्दगी उस पार क्या है

सरफिरे हैं लोग जानी, अट-पटा सा‌ दौर है ये
शख़्स इक है दो मुखौटे, इस जहाँ का सार क्या है।

आँख से आँखें मिलाना, मुस्कुराना मुस्कुराना
जान ले कर भूल जाना, ख़ुद समझना वार क्या है।

— lalit mohan bhatt

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Nigaah Shayari

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