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Hindustan Shayari
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई 'मजरूह'
हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे
Majrooh Sultanpuri
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तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के
आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने
चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के
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Rahat Indori
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दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
Lal Chand Falak
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लड़ने के लिए क़ौम मेरे साथ खड़ा है
सहने के लिए एक फ़क़त आदमी मैं हूँ
Saarthi Baidyanath
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फ़क़त इक आबरू महँगी बहुत है
वगरना जिस्म तो मिट्टी है साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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आशिक़ों के नगर में रहते हो
या'नी मिट्टी के घर में रहते हो
Saarthi Baidyanath
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हमारे मुल्क में चारों तरफ़ है अम्न-ओ-अमान
बहुत दबाव में ये बात कह रहा हूँ मैं
Ramnath Shodharthi
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ख़ाक हो जाएँगे हम ख़ाक में मिल कर तेरी
तुझ से रिश्ता न कभी अरज़े वतन टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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वतन के वास्ते सबके फ़राइज़ हैं
वतन की बात करना भी ज़रूरी है
Saarthi Baidyanath
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की
लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे
देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर
अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे
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Kanval Dibaivi
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भुला दो रंग नफ़रत के , तिरंगा हाथ में ले कर
दिखा दो तीन रंगों का सभी को प्यार होली में
Vijay Anand Mahir
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घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में
Qaisar-ul-Jafri
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग
रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
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चलो ऐ हिंद के सैनिक कि लहराएँ तिरंगा हम
जिसे दुनिया नमन करती है उस पर्वत की चोटी पर
ATUL SINGH
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मैं ने बस इतना पूछा था क्या देखते हो भला
मैं ने ये कब कहा था मुझे देखना छोड़ दो
गीली मिट्टी की ख़ुशबू मुझे सोने देती नहीं
मेरे बालों में तुम उँगलियाँ फेरना छोड़ दो
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Tajdeed Qaiser
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उस के कूज़ागर को बस उतनी ही मिट्टी कम पड़ी
जितनी मिट्टी लग रही थी दिल बनाने के लिए
Ravindra pareek gurgul
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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए
कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए
सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त
नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए
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Neeraj Neer
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फिर दयार-ए-हिन्द को आबाद करने के लिए
झूम कर उट्ठो वतन आज़ाद करने के लिए
Altaf Mashhadi
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