न लोगों को न ही उस को बताने से
मोहब्बत में नहीं डरना ज़माने से
सफ़र पर निकले जब भी हम सफ़र हो तू
मिरे भी थे ये कुछ सपने सुहाने से
रुलाया रात भर तन्हाई ने तो फिर
मज़ा आया गुलाबो को जलाने से
फ़लक तक मैं चला जाता अगर फिर यूँ
सुब्ह होती सितारों को बुझाने से
— Mukesh Yadav















